नमाज़ का हिसाब
नमाज़ की ऐसी बही जो सच कहती है पर उपदेश नहीं देती। हर फ़र्ज़ नमाज़ वक़्त पर, देर से, छूटी या माज़ूर के तौर पर दर्ज होती है, और चाहें तो “जमाअत के साथ” का निशान भी। इसी से EsSiraj वे बातें निकालता है जो याददाश्त नहीं बता सकती: कौन-सी नमाज़ फिसल रही है (क़रीब-क़रीब कभी वह नहीं होती जो आप समझते हैं), खालीपन पूरे महीने में बिखरा है या किसी एक भारी हफ़्ते में इकट्ठा, आपकी मौजूदा और सबसे लंबी लड़ी, और जो क़ज़ा बाक़ी है उसका हिसाब। माज़ूरी के दिन — हैज़, बीमारी, सफ़र — न अदा गिने जाते हैं न छूटे हुए, और कोई लड़ी नहीं तोड़ते।
- एक टैप में चार हालतें, साथ में “जमाअत के साथ”
- हर नमाज़ की पाबंदी अलग-अलग — देखिए कौन-सी सचमुच फिसल रही है
- महीने का कैलेंडर, साल का नक़्शा, दिन / महीना / साल की ग्रिड
- लड़ियाँ, तीस दिन का रुझान, और क़ज़ा का हिसाब
- माज़ूरी के दिन कभी छूटे हुए नहीं गिने जाते और लड़ी नहीं तोड़ते
- गुज़रे किसी भी दिन को सुधारें — जो बही सुधारी न जा सके, वह छोड़ दी जाती है
- १००% आपके ही उपकरण पर — न खाता, न सर्वर, न कोई निगरानी